सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड क्या है Sovereign Gold Bonds In Hindi

Sovereign Gold Bonds In Hindi
What Is Sovereign Gold Bonds Scheme In Hindi

भारत में सोने (Gold) का उपयोग सिर्फ ज्वैलरी बनाने या निवेश के लिए नहीं होता है बल्कि इसका उपयोग Emergency Fund की तरह भी होता है। इसलिए भारत में सोने की खरीदी बहुत ज्यादा होती है। सोने को घर में खरीदकर रखने से देश की Economy को कोई भी फायदा नहीं होता है बल्कि इससे देश को नुकसान होता है। 

भारत में सोने की डिमांड बहुत ज्यादा है। इतनी ज्यादा डिमांड की भारत सरकार को दुसरे देशो से सोना आयात (Import) करना पड़ता है जिसकी वजह से भारत के Forex Reserve पर बुरा असर पड़ता है और वह कम हो जाते है। सोने की बहुत ज्यादा डिमांड से इकॉनमी पर हो रहे बुरे असर से इकॉनमी को बचाने के लिए ही भारत सरकार ने Sovereign Gold Bonds Scheme की शुरुआत की है। 

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड क्या है Sovereign Gold Bonds In Hindi: इस स्कीम में निवेशकों को Physical Gold अपने रखने की जगह पर Gold Bond खरीद कर अपने पास रख सकते है। गोल्ड बॉन्ड खरीद कर अपने पास रखने का सबसे बड़ा फायदा यह है की इसमें आपको फिजिकल गोल्ड नहीं खरीदना पड़ता है सिर्फ बॉन्ड की रिसिप्ट (एक कागज़) अपने पास रखना होता है। जब भी बांड को बेचते है तो मार्किट वैल्यू पर पैसे भी मिल जाते है इसके अलावा सरकार Sovereign Gold Bond Scheme पर सालाना 2.5% का ब्याज भी देती है। जो की एक Extra Income की तरह होता है।

यदि कोई व्यक्ति सोने में निवेश करना चाहता है या सोना खरीद पर अपने पास रखना चाहता है जिससे की वह भविष्य में ज्वैलरी बना सके। ऐसे लोगों के लिये Gold Bond में निवेश करना फायदेमंद हो सकता है। यदि कोई वास्तविक सोना अपने पास रखता है तो उसके साथ धोखाधड़ी, चोरी होने की संभावना होती है लेकिन गोल्ड बॉन्ड में आप वास्तविक सोना नहीं खरीदते है बल्की सिर्फ एक कागज का टुकड़ा खरीदते है जिस पर लिखा होता है आपने कितना सोना ख़रीदा है।

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Sovereign Gold Bonds Scheme के सम्बन्ध में ध्यान रखने वाली बातें 

  1. इस बॉन्ड को कोई भी भारतीय नागरिक, हिंदू अविभाजित परिवार, विश्वविधालय, ट्रस्ट, धर्मादा संस्थान खरीद सकते है।
  2. एक वित्तीय वर्ष में न्यूनतम 1 ग्राम सोना खरीद सकते है और अधिकतम 4 किलों सोना ख़रीदा जा सकता है। जबकि बड़े संस्थानों के लिए खरीदने की सीमा 20 किलो है।
  3. Gold Bond को गिरवी रख के Loan लिया जा सकता है। इसके अलावा निवेशक को सालाना 2.5% का ब्याज भी मिलता है यह ब्याज आपकी कुल इनकम में जोड़ा जाता है और इस पर आयकर भी देना होता है। लेकिन सोने की कीमत बढ़ने पर जो लाभ होता है उस पर कोई टैक्स नहीं देना होता है।
  4. इस स्कीम में गोल्ड बॉन्ड का Maturity Period (परिपक्व अवधि) 8 साल होती है। लेकिन आप इसे 5 साल बाद भी स्टॉक एक्सचेंज पर बेच सकते है। इस बांड को डीमैट या कागज़ के रूप में भी अपने पास रख सकते है।
  5. गोल्ड बॉन्ड में निवेश करना पूरी तरह से सुरक्षित है क्योंकि यह भारत सरकार द्वारा जारी किये जाते है। Gold Bond की गारंटी भारत लेती है।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश कैसे करें 

इन गोल्ड बांड्स को आप कमर्शियल बैंक, पोस्ट ऑफिस और स्टॉक एक्सचेंज से खरीद सकते है।  

गोल्ड बॉन्ड में निवेश करके आप फिजिकल गोल्ड नहीं खरीद सकते है। Sovereign Gold Bonds परिपक्व होने पर राशि रुपयों में वापिस की जाएगी। गोल्ड पर ब्याज की गणना वर्तमान कीमत पर की जाती है। जिस समय गोल्ड बांड में निवेश किया गया था यदि Maturity के समय सोने की कीमत उससे कम हो जाती है तो इसका जोखिम स्वयं निवेशक को भुगतना होगा सरकार इसके लिए जिम्मेवार नहीं है। ऐसी कंडीशन में सरकार Gold Bond में निवेश की अवधि को 3 साल बढ़ाने का मौका देती है।(सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड क्या है Sovereign Gold Bonds In Hindi) 

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