डेरिवेटिव ट्रेडिंग क्या है? - What Is Derivative Trading In Hindi

डेरिवेटिव ट्रेडिंग क्या होता है? - What Is Derivative Trading In Hindi: डेरीवेटिव एक फाइनेंसियल कॉन्ट्रैक्ट होता है जिसकी वैल्यू उसके Underlying Asset से Derive होती है। डेरीवेटिव स्टॉक मार्किट में ट्रेडिंग करने का सबसे लोकप्रिय तरीका है क्योंकि इसमें किसी भी कमोडिटी या स्टॉक की बिना डिलीवरी लिए उसे खरीदकर बेचा जा सकता है। डेरीवेटिव ट्रेडिंग में ख़रीदे गये शेयर्स डीमैट अकाउंट में नहीं आते है किसी भी कमोडिटी या स्टॉक की कीमत में जो उतार - चढ़ाव आता है उसका फायदा उठाने के लिये  डेरीवेटिव ट्रेडिंग की जाती है। 

डेरीवेटिव क्या होता है इसके ऊपर मैंने पहले से ही एक पोस्ट लिखी है अगर आपको नहीं पता की What Is Derivative तो आप उस पोस्ट को जरूर पढ़िए। आज की इस पोस्ट में डेरीवेटिव ट्रेडिंग क्या है और डेरीवेटिव ट्रेडिंग कैसे करें उसके बारे में बात करेंगे। 

What Is Derivative Trading In Hindi

How To Start Derivatives Trading In India

डेरीवेटिव ट्रेडिंग स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से की जाती है लेकिन आप सीधे स्टॉक एक्सचेंज से डेरीवेटिव कॉन्ट्रैक्ट Buy Sell नहीं कर सकते है। इसके लिये किसी स्टॉक ब्रोकर के पास ट्रेडिंग अकाउंट ओपन करवाना होगा। डेरीवेटिव में Future Trading Start करने के लिए 2 से 5 लाख रुपये की जरुरत होती है और वहीं Option Trading Start करने के लिए 50 हज़ार से 1 लाख रुपये तक की जरुरत होती है। 

Future And Option दोनों Leverage Product होते है और इसमें ट्रेड लेने के लिये सिर्फ मार्जिन अमाउंट ही ट्रेडिंग अकाउंट में रखना होता है और जब तक ट्रेड कम्पलीट न हो जाये तक तक उस मार्जिन अमाउंट को निकाल नहीं सकते है। डेरीवेटिव ट्रेडिंग उन लोगो के लिए सही है जो शार्ट टर्म में ट्रेड लेकर जल्दी मुनाफा कमाना चाहते है या जो अपने पोर्टफोलियो को Hedge करना चाहते है।(What Is Derivatives Trading Meaning In Hindi)

डेरिवेटिव ट्रेडिंग के प्रकार (Types of Derivatives Trading)

डेरीवेटिव ट्रेडिंग 2 प्रकार से की जाती है एक फ्यूचर ट्रेडिंग और दूसरा ऑप्शन ट्रेडिंग। जिसे हम F&O Trading भी कहते है। किसी भी समय 3 फ्यूचर या ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध होते है। डेरीवेटिव कॉन्ट्रैक्ट की अधिकतम वैधता 3 महीने की होती है। हर महीने के अंतिम गुरूवार को फ्यूचर और ऑप्शन का एक कॉन्ट्रैक्ट समाप्त हो जाता है जो 3 महीने पहले शुरू हुआ था। 

1. Futures Trading: फ्यूचर ट्रेडिंग एक कॉन्ट्रैक्ट होता है जो किन्हीं दो पार्टियों को भविष्य की तारीख पर पहले से निर्धारित प्राइस और मात्रा में किसी एसेट (स्टॉक, करेंसी या कमोडिटी) को खरीदने या बेचने का अधिकार देता है। यह कॉन्ट्रैक्ट पूरी तरह से बाध्य होता है यानि की भविष्य की तारीख पर उस ट्रेड को कम्पलीट करना होता है। सभी Future Contract की एक Expiry होती है और उस एक्सपायरी से पहले उस कॉन्ट्रैक्ट को क्लोज करना होता है। नहीं तो पेनेल्टी चुकानी पड़ती है। 

2. Option Trading: ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट को Buy करने के लिये सिर्फ कुछ प्रीमियम चुकाना होता है जिसके बदले में भविष्य की किसी तारीख पर पहले से निर्धारित प्राइस और मात्रा में किसी एसेट (स्टॉक, करेंसी या कमोडिटी) को खरीद या बेच सकते है। ऑप्शन ट्रेडिंग कॉन्ट्रैक्ट पूरी तरह से बाध्य नहीं होता है ट्रेडर चाहे तो इस सौदे को रद्द भी कर सकते है लेकिन उसके बदले में उन्हें उनका प्रीमियम वापिस नहीं मिलता है।(What Is derivatives Trading In Stock Market) 

Derivative Trading कहाँ पर की जा सकती है 

1. Currency Derivatives: करेंसी डेरीवेटिव में करेंसी जैसे: रूपया, डॉलर, यूरो इत्यादि को खरीदने या बेचने का कॉन्ट्रैक्ट किया जाता है। किसी भी देश की करेंसी हो उसमें उतार - चढ़ाव आते रहते है और उसी उतार - चढ़ाव से अपने पुराने निवेश को बचाने या नये करेंसी के कॉन्ट्रैक्ट खरीदकर मुनाफा कमाने के लिये इनमें ट्रेड लिया जाता है। 

2. Equity Derivatives: स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड कंपनियों के शेयर के Future Contract को खरीदने या बेचने को Equity Derivative Trading कहते है। जैसे: रिलायंस का फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट, टाटा मोटर्स का फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट इत्यादि। 

3. Commodity Derivatives: कमोडिटी डेरीवेटिव में कमोडिटी जैसे: जौ, गेहूं, सोयाबीन, धनिया, जीरा, हल्दी, सोना, चांदी, क्रूड ऑइल, नेचुरल गैस इत्यादि को खरीदने या बेचने का कॉन्ट्रैक्ट किया जाता है।(डेरिवेटिव ट्रेडिंग क्या है? - What Is Derivative Trading In Hindi) 

डेरीवेटिव के सम्बन्ध में ध्यान रखने वाली बातें 

Lot Size: डेरीवेटिव ट्रेडिंग में अपने मन मुताबिक शेयर नहीं खरीद सकते है बल्कि पहले से निर्धारित Lot Size में शेयर ख़रीदे जाते है। 

Margin: डेरीवेटिव ट्रेडिंग में जितने शेयर ख़रीदे है उनके पुरे पैसे नहीं चुकाने होते है बल्कि कुछ प्रतिशत मार्जिन देकर शेयर ख़रीदे जाते है। सभी स्टॉक, कमोडिटी और करेंसी के लिए उनमे शामिल जोखिम के अनुसार अलग - अलग मार्जिन लिया जाता है। 

Expiry: सभी फ्यूचर और ऑप्शन के कॉन्ट्रैक्ट हर महीने Expire हो जाते है और उनके बदले में नये कॉन्ट्रैक्ट मार्किट में आते है। आप 1 महीने से लेकर 3 महीने तक के Future And Option Contract खरीद सकते है।  

Hedging: हेजिंग एक तरीका है जो किसी भी निवेशक के पैसे को मार्किट के उतार - चढ़ाव से बचाता है। हेजिंग डेरीवेटिव मार्किट की सहायता से की जाती है। 

Speculation: टेक्निकल एनालिसिस के बेसिस पर किसी भी स्टॉक या कमोडिटी में ट्रेड लेने को स्पेकुलेशन कहते है। डेरीवेटिव मार्किट में फायदा उठाने के लिए टेक्निकल एनालिसिस का ही उपयोग किया जाता है। 

Arbitrage: एक ही स्टॉक या कमोडिटी के दो अलग - अलग कॉन्ट्रैक्ट के प्राइस में जब अंतर आ जाता है तो एक कॉन्ट्रैक्ट में Buy करके दूसरे कॉन्ट्रैक्ट को Sell कर दिया जाता है और महीने के अंत में एक्सपायरी के समय जब उन दोनों कॉन्ट्रैक्ट की प्राइस समान हो जाती है तब एक साथ दोनों कॉन्ट्रैक्ट को Square Off कर दिया जाता है और प्रॉफिट बुक कर लिया जाता है।(What Is Derivative Trading In Share Market)

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