How To Invest In IPO In Hindi - आईपीओ में निवेश कैसे करें

आईपीओ में इनवेस्ट कैसे किया जाता है (How To Invest In IPO In Hindi): रिटेल निवेशक IPO में 2 लाख रुपये तक के शेयर खरीद सकते है उससे ज्यादा नहीं खरीद सकते है। आईपीओ में ऑनलाइन आवेदन करने के लिये बैंक अकाउंट, ट्रेडिंग और डीमैट अकाउंट, पैन कार्ड होना जरूरी है। जो भी कंपनी अपना आईपीओ लेकर आयी है वह निवेशकों को 3 - 10 दिनों का समय देती है IPO में निवेश करने लिए और उसी समय के दौरान आपको अपने ब्रोकर के पास एक फॉर्म भरकर आईपीओ के लिए अप्लाई करना पड़ता है। 

How To Invest In IPO In Hindi


आईपीओ में आवेदन कैसे करें? (How To Apply For IPO In Hindi)

आईपीओ में Online और Offline दोनों तरीकों से निवेश किया जा सकता है लेकिन ऑनलाइन तरीके से आवेदन करना ज्यादा सुविधाजनक होता है। IPO आवेदन करने के लिये डीमैट अकाउंट का होना अनिवार्य है। क्योंकि शेयर Allotment होने के बाद सीधे डीमैट अकाउंट में आते है। 

ऑफलाइन आवेदन कैसे करे: आईपीओ में निवेश करने के लिए सबसे पहले अपने ब्रोकर से संपर्क करें जिसके साथ आपने अपना डीमैट अकाउंट ओपन करवाया है, और उसे बताये की आपको आईपीओ में निवेश करना है। 

ब्रोकर आपको एक फॉर्म प्रोवाइड करेगा जिसमें अपनी डीमैट अकाउंट डिटेल और जिस भी कंपनी के IPO में भाग लेना चाहते है उसके शेयर की बोली लगानी होगी। बोली वह प्राइस होती है जिस पर आप उस आईपीओ में मिलने वाले शेयर्स को खरीदना चाहते है।

उसके बाद उस फॉर्म को जमा करा दें। अगर आपको आबंटन मिला तो इसकी जानकारी ब्रोकर दवारा आपको दे दी जायेगी।  

ऑनलाइन आवेदन कैसे करें: आईपीओ में ऑनलाइन आवेदन करने का सबसे बड़ा फायदा यह है की अगर आपको शेयर का आबंटन मिलता है तो ही भुगतान करना होगा।  

जब तक IPO के Allotment की प्रक्रिया पूरी नहीं होती तब तक आपकी राशि को बैंक द्वारा ब्लॉक कर दिया जाता है, अगर आपको शेयर Allot हो जाते है तो वह पैसा डेबिट हो जाता है नहीं तो उस पैसे को अनब्लॉक कर दिया जाता है। 

ऑनलाइन आवेदन करने में ज्यादा कुछ नहीं करना होता है बल्कि अपने ब्रोकर के प्लेटफार्म पर जाकर सिर्फ IPO के लिये Apply करना होता है आपकी जानकारी आपके ब्रोकर के पास पहले से ही होती है इसलिये आपको अलग से कोई फॉर्म नहीं भरने की जरुरत नहीं है।How To Invest In IPO In Hindi


आईपीओ में निवेश करने से पहले ध्यान रखने योग्य बातें

Price Band: प्राइस बैंड वो अधिकतम और न्यूनतम प्राइस होती है जिसके बीच में IPO के लिये बोली लगानी होती है। आम तौर पर जो कंपनी आईपीओ लेकर आ रही है उसे इजाजत होती है की वह अपना प्राइस बैंड निर्धारित कर सकें।  

Last Price: आईपीओ का प्राइस बैंड निर्धारित होने के बाद आम निवेशक जो आईपीओ में बोली लगाना चाहते है वह अपनी - अपनी बोली लगाते है की वह किस प्राइस पर शेयर खरीदना चाहते है। कुछ निवेशक आईपीओ की किसी भी प्राइस पर शेयर खरीदने के लिए तैयार होते है ऐसे निवेशक Cut Off Price पर बोली लगाते है Cut Off Price प्राइस बैंड की वह अंतिम प्राइस होती है जिस पर शेयर्स Allot होते है।  

Lot Size: IPO में अपनी मर्जी से जितने चाहे उतने शेयर नहीं खरीद सकते है बल्कि पहले से निर्धारित Lot Size में ही शेयर खरीद सकते है एक लोट में 10, 20, या 50 शेयर भी हो सकते है। यह IPO लाने वाली कंपनी पर निर्भर करता है की वह एक लोट में कितने शेयर रखना चाहती है। 

Capital Of IPO: कंपनी आईपीओ के माध्यम से कितनी रकम मार्किट से उठाना चाहती है और बदले में वह अपने कितने शेयर पब्लिक कर रही है आईपीओ में निवेश करने से पहले इसकी जानकारी भी होनी चाहिये।

Cut Off Date And Time: कंपनी अपना आईपीओ लाने से पहले एक टाइम टेबल जारी करती है जिसमे IPO में अप्लाई करने से लेकर अलॉटमेंट, लिस्टिंग होने तक के सभी कार्यक्रम के बारे में समय और तारीख अनुसार बताया जाता है।(How To Buy IPO In Hindi)


आईपीओ आवंटन प्रक्रिया (IPO Allotment Process in Hindi)

कंपनी ने जितने शेयर्स बेचने के लिये IPO लाया है जब उससे ज्यादा लोग शेयर खरीदने के लिये अप्लाई कर देते है तो इसे आईपीओ का Oversubscribe होना कहते है। और जब बहुत कम लोग IPO में निवेश करते है तो इसे आईपीओ का Undersubscribe होना कहते है।

जितने शेयर्स कंपनी जारी कर रही है अगर उतने ही एप्लीकेशन आती है तो सबको उनके दवारा लगाई गई बोली के अनुसार शेयर Allot कर दिये जाते है। 

और अगर रिटेल केटेगरी के शेयर Oversubscribe हो जाते है तो Lottery निकालकर आईपीओ का Allotment किया जाता है।How To Invest In IPO In Hindi

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