डेरिवेटिव मार्किट क्या है - Derivatives Market Definition In Hindi

डेरिवेटिव मार्किट क्या है - Derivatives Market Definition In Hindi: डेरीवेटिव एक एसेट होती है जिसकी वैल्यू किसी अंडरलाइन एसेट से Derive होती है, इसलिए इस Derive एसेट को डेरीवेटिव कहते है। जैसे: सोने की रिंग सोने से बनती है तो सोने की रिंग सोने का डेरीवेटिव होगी। ठीक वैसे ही दूध से दही बनता है तो दही भी दूध का डेरीवेटिव है। 

अगर स्टॉक मार्किट की बात करें तो निफ़्टी फ्यूचर भी एक डेरीवेटिव है जिसकी वैल्यू निफ़्टी में शामिल सभी शेयर के भाव से बनती है। अगर किसी एक सिंगल शेयर की बात करे तो Reliance Future Contract की कीमत रिलायंस इक्विटी शेयर के भाव से Derive होती है। 

डेरीवेटिव एक नहीं दो चीज़ होती है एक वह वस्तु या प्रोडक्ट जो की Underlying Asset है और दूसरी वह वस्तु जो इस Underlying Asset से बनी हुई है। जब Underlying Asset की कीमत में बदलाव आता है तभी Derive Product की प्राइस में बदलाव आता है।(Derivatives Meaning In Share Market In Hindi) 

Derivatives Market Definition In Hindi

डेरीवेटिव 3 तरह की होती है -

1. Commodity Derivatives: Consumption से जुडी हुई सभी वस्तुओं को कमोडिटी डेरीवेटिव कहते है जैसे: चावल, क्रूड ऑइल, सोना, चांदी इत्यादि वे सभी वस्तुए जिनका उपभोग किया जाता है वे सभी कमोडिटी डेरीवेटिव होती है। 

2. Currency Derivatives: रुपये, डॉलर, पाउंड ये सभी करेंसी डेरीवेटिव के उदाहरण है। 

3. Equity Derivatives: वे सभी कॉन्ट्रैक्ट जिनको स्टॉक मार्किट में ट्रेड किया जाता है उन्हें इक्विटी डेरीवेटिव कहते है जैसे: Shares, Bonds, Debenture etc. 

डेरिवेटिव मार्किट कैसे काम करता है 

डेरीवेटिव कॉन्ट्रैक्ट एक वादा होता है जो Buyer और Seller एक दूसरे से करते है। जिसमे वह किसी Currency, Commodity या Share को भविष्य की किसी तारीख पर पहले से निर्धारित प्राइस और मात्रा में खरीदते है। चूँकि यह एक वादा है तो आपको पहले ही पुरे पैसे देने की जरुरत नहीं है जब वह तारीख आ जाये जिस पर आपने माल को खरीदने या बेचने का कॉन्ट्रैक्ट किया है उस दिन माल की डिलीवरी लेकर पैसे देने होते है। 

यह बिलकुल भी जरूरी नहीं होता है की जो वादा Buyer और Seller ने एक दुसरे से किये है उसे पूरा किया ही जाये। जब कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी तिथि नजदीक आये तो Buyer और Seller इस सौदे को रद्द भी कर सकते है जिसे कॉन्ट्रैक्ट को Square Off करना कहते है। अगर Buyer और Seller चाहे तो इस कॉन्ट्रैक्ट को एक महीना आगे भी ले जा सकते है जिसे रोल ओवर करना कहते है।(What Is Derivative In Share Market) 

डेरिवेटिव मार्किट क्यों जरूरी है 

स्टॉक मार्किट बहुत ही वोलेटाइल है और कई बार बड़ी - बड़ी कंपनियों, व्यापारियों और निवेशकों को मार्किट के उतार - चढ़ाव की वजह से नुक्सान होने की संभावना होती है। ऐसे में वह डेरीवेटिव मार्किट में कॉन्ट्रैक्ट Buy Sell करके अपने रिस्क को कम करते है। 

हालाँकि कई स्टॉक मार्किट ट्रेडर डेरीवेटिव मार्किट में सट्टा करके पैसा कमाने की कोशिश करते है जिसमें वह कई बार सफल हो जाते है तो कई बार उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है। 

डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट के प्रकार 

डेरीवेटिव मार्किट में 4 प्रकार के कॉन्ट्रैक्ट होते है जिसमें Future Contract और Option Contract सर्वाधिक लोकप्रिय है जिसे हम F&O Market के नाम से भी जानते है। 

Forward Market: फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट एक OTC (Over The Counter) कॉन्ट्रैक्ट होता है जिसमें Buyer और Seller आपस में मिलकर कॉन्ट्रैक्ट बनाते है इसमें कोई तीसरा पक्ष शामिल नहीं होता है। यह कॉन्ट्रैक्ट रिस्की होते है।  

Future Market: फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट एक Exchange Traded Contract होता है जो की स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड होता है। यह भी दो लोगों के मध्य में होता है लेकिन यह कॉन्ट्रैक्ट स्टॉक एक्सचेंज द्वारा Exercise करवाया जाता है इसलिए इसमें डिफ़ॉल्ट नहीं होता है। 

Option Market: ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट एक Exchange Traded Contract है जो किसी भी Buyer और Seller को यह अधिकार देता है की वह भविष्य की किसी तारीख पर उस Underlying Product को खरीद और बेच सकता है लेकिन यह कॉन्ट्रैक्ट बाध्य नहीं है। 

Swap Market: यह आम निवेशकों के लिए नहीं होता है इसमें एक तरफ से Cash Flow किया जाता है। Swap Contract का सबसे सामान्य उदाहरण एक Interest Rate Swap है।(डेरिवेटिव मार्किट क्या होता है - What Is Derivatives Market In Hindi

डेरिवेटिव मार्किट और इक्विटी कैश मार्किट में अंतर 

निवेश करने के अनुसार स्टॉक मार्किट में दो सेगमेंट होते है एक इक्विटी कैश सेगमेंट और दूसरा डेरीवेटिव सेगमेंट।   

Equity Cash Market में जब हम कोई शेयर खरीदते है तो उसके लिये पुरे पैसे चुकाने होते है जैसे: अगर कोई शेयर 100 रुपये का है तो उसके लिये पुरे 100 रुपये चुकाने होंगे। और उस ख़रीदे गए शेयर को हम जब तक चाहे तब तक अपने पास रख सकते है। इसके अलावा इक्विटी कैश मार्किट में Short Selling सिर्फ इंट्राडे के लिये होती है। 

Derivatives Market में एक पहले से निर्धारित Lot Size में शेयर खरीदने होते है और उस लोट को आप हमेशा के लिये अपने पास नहीं रख सकते है बल्कि हर महीने उसकी एक एक्सपायरी होती है और उस एक्सपायरी से पहले उसे बेचना होता है। डेरीवेटिव मार्किट में शेयर खरीदने के लिये शेयर की मार्किट वैल्यू के अनुसार पूरा पैसा नहीं चुकाना होता है सिर्फ कुछ मार्जिन चुकाना होता है। डेरीवेटिव मार्किट में Short Selling को एक्सपायरी तक होल्ड कर सकते है।(डेरिवेटिव मार्किट क्या है - Derivative Market Meaning In Hindi)

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